माधवन ने कहा, ‘‘हमने इस बड़े प्रोजेक्ट का प्रारंभिक डिजाइन तैयार कर लिया है। सरकार इस साल प्रोजेक्ट को मंजूरी देती है तो 2023 में पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लिया जाएगा। हमारी योजना कम से कम 500 हेलिकॉप्टर का निर्माण करने की है।’’
9,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे
न्यूज एजेंसी से इंटरव्यू में माधवन ने कहा, ‘‘एमआई-17 के बेड़े को रिप्लेस करने के लिए 10 से 12 टन श्रेणी के हेलिकॉप्टर का निर्माण किया जाएगा। इसका निर्माण देश में ही किया जाना है। हेलिकॉप्टर के प्रोटोटाइप के निर्माण और डिजाइन पर 9,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अगर हमें 2020 में अनुमति मिल जाती है तो हम पहले हेलिकॉप्टर का निर्माण 2027 तक कर लेंगे।’’ एक सैन्य विशेषज्ञ ने तेजस सैन्य विमान के विकास के बाद इसे एचएएल का दूसरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया।
हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जाएगा
माधवन ने इस मेगा प्रोजेक्ट पर कहा, ‘‘हम एयरफोर्स और नेवी के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। 10-12 टन श्रेणी के कैटेगरी में दो बेसिक स्ट्रक्चर होंगे। नेवी वर्जन का आकार आर्मी और एयरफोर्स से अलग होगा।’’ माधवन ने कहा कि हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जा सकेगा।
एमआई-17 को 2032 तक रिप्लेस किए जाने की योजना
एमआई-17 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर के बेड़े की रीढ़ है और उन्हें 2032 तक रिप्लेस किए जाने की योजना है। एचएएल द्वारा बनाए गए युद्ध हेलिकॉप्टरों में एलसीएच (लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर) और मल्टी-रोल एएलएच (एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर) और चेतक जैसे कई हेलिकॉप्टर शामिल हैं।